
बात है 1 जनवरी की मेरे कोंलेज में 1 जनवरी को नया सेमेस्टर शुरू हो जाता है आज दिन में 12 बजे मेरी कोंलेज वापसी की ट्रेन थी और सुबह के 8 बज चुके थे जाग तो मैं चुका था लेकिन अभी भी खाट पर लेटा हुआ था चादर ओढ़कर तभी पिताजी नहाकर तौलिये से सिर पोंछते हुए मेरे कमरे में आते हैं और हल्के ऊंचे स्वर में बोलते हैं
"रात किस लड़की का फोन आया था वो ?"
"अलका का क्यों ?"
"मैं देख रहा हूँ कि तीसरे चौथे दिन इस लड़की का फोन तुम्हे आता है चक्कर क्या है ?"
"अरे ! भाई मानती है वो मुझे सात साल नवोदय में मेरे साथ पढ़ी है इसलिए आता रहता है उसका फोन क्यों क्या हुआ ?" अब तक पिताजी की बातों से मुझे खींच होने लगी थी
"तुम्हारे चाचा का पता है ना कैसे गैर बिरादरी की लड़की को भगा लाया था नाक कट गयी थी पूरे खानदान की समाज में "
"अरे ! बहन बोलता हूँ मैं उसे 10 साल से राखी बंधवा रहा हूँ " मुझे समझ नहीं आ रहा था कि पिताजी ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं और उन की बातें मुझे काफी अखर रही थी
"तुम्हें राखी क्यों बांधती है ? उसके खुद के भाई नहीं हैं ?"
"हाँ हैं तो ?"
"तो उस लड़की को फोन करके साफ़-साफ़ बोल दो कि आज के बाद तुम्हें फोन ना करे मुझे ये कतई पसंद नहीं है "
"पिताजी ! देखिये मुझसे तो नहीं बोला जाएगा उससे ये सब आपको दिक्कत है तो ये लीजिये नंबर और खुद फोन करके बोल दीजियेगा जो बोलना है "
"हाँ लाओ देओ मुझे नंबर "
मैंने आवेश में फटाक से नंबर देकर मोबाईल वहीँ पटक दिया और अपना सामन उठाकर 9 बजे ही घर से निकल गया और 12 बजे ट्रेन पकड़ कर अपना कोंलेज पहुँच गया
"रात किस लड़की का फोन आया था वो ?"
"अलका का क्यों ?"
"मैं देख रहा हूँ कि तीसरे चौथे दिन इस लड़की का फोन तुम्हे आता है चक्कर क्या है ?"
"अरे ! भाई मानती है वो मुझे सात साल नवोदय में मेरे साथ पढ़ी है इसलिए आता रहता है उसका फोन क्यों क्या हुआ ?" अब तक पिताजी की बातों से मुझे खींच होने लगी थी
"तुम्हारे चाचा का पता है ना कैसे गैर बिरादरी की लड़की को भगा लाया था नाक कट गयी थी पूरे खानदान की समाज में "
"अरे ! बहन बोलता हूँ मैं उसे 10 साल से राखी बंधवा रहा हूँ " मुझे समझ नहीं आ रहा था कि पिताजी ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं और उन की बातें मुझे काफी अखर रही थी
"तुम्हें राखी क्यों बांधती है ? उसके खुद के भाई नहीं हैं ?"
"हाँ हैं तो ?"
"तो उस लड़की को फोन करके साफ़-साफ़ बोल दो कि आज के बाद तुम्हें फोन ना करे मुझे ये कतई पसंद नहीं है "
"पिताजी ! देखिये मुझसे तो नहीं बोला जाएगा उससे ये सब आपको दिक्कत है तो ये लीजिये नंबर और खुद फोन करके बोल दीजियेगा जो बोलना है "
"हाँ लाओ देओ मुझे नंबर "
मैंने आवेश में फटाक से नंबर देकर मोबाईल वहीँ पटक दिया और अपना सामन उठाकर 9 बजे ही घर से निकल गया और 12 बजे ट्रेन पकड़ कर अपना कोंलेज पहुँच गया
इन बातों को आज 8 मास गुजर चुके हैं अब अलका का फोन नहीं आता है







